Vivek Gupta

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इंजीनियरिंग का चुतियापा बंद करे

By vivek | February 2, 2019 | 0 Comment

माफ़ करना, ईससे बेहतर शब्द मेरी समझ में नहीं आया इस विषय के लिए | पिछले दो सालो से काफी घूम रहा हु | अभी विदेश भी हो आया| कोशिश करता हूँ की जहा जाऊ वहा के स्थानीय स्कूल में एक चक्कर लगा आउ | स्कूल के बच्चे काफी हैरान कर देते है | बड़े जूनून से सीखते है, खासकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे| पर इंजीनियरिंग में पढ़ने वाले बच्चे जैसे गधे होते जा रहे है | पिछले छह सालो में कई बच्चो से मिला जो इंजीनियरिंग कर रहे है पर सवाल पूछो तो वही असलियत सामने आ जाती है| भगवन जाने क्या पढ़ते और पढ़ा रहे है | प्रक्टिकल्स का कोई ठिकाना नहीं | और टिकटोक , PUBG जैसे APPS ने आग में घी डालने का काम किया है | बच्चो की गलती कम और गाइड की गलती ज्यादा लगती है| PEER प्रेशर में आके इंजीनियरिंग ले लिया पर पता नहीं क्या कर रहे है | पहले २ साल ग्यारवी और बारवी में MAINS देने के लिए घिसे फिर ४ साल इंजीनियरिंग में घिसे. उसके बाद और एक साल जॉब नहीं लगने के वजह से एक्स्ट्रा कोर्सेज में घिसे. सुना है वह अध्यापको को भी ठीक तरीके से तन्खा नहीं मिलती| एक रिपोर्ट आयी थी इकनोमिक टाइम्स की , की ९४% इंजीनियर ग्रेजुएट्स नौकरी के लायक नहीं है| कमाल की बात ये है की हम उस देश की बात कर रहे है जहा से सुन्दर पिचाई, सत्या नडेला, नारायणा मूर्ति जैसे इंजीनियर बड़ी बड़ी कंपनी चला रहे है | पिछले तीन साल से यूट्यूब पे वीडियोस डाल रहा हूँ और सात सालो से खली समय में पढ़ा भी रहा हूँ | मेरे इंजीनियरिंग फील्ड से रिलेटेड | ये तो बोल सकता हूँ की सिर्फ कोसने की जगह उसे सुधरने के लिए कुछ काम कर रहा हूँ | पर वहा भी ये एहसास हो जाता है की कुछ तो दिक्कत है हमारे इंजीनियरिंग कॉलेजेस में | जहा एक और बहार के लोगो का सवाल बड़ा फोकस्ड होता है वही हमारे कुछ इंजीनियर को सिर्फ कोड चाहिए होता है | वही रायता फैला देते है | कई टैलेंटेड लोगो को जनता हूँ | कुछ बढ़िया drama करते, कुछ पेंटिंग, कुछ कविताये लिखते और कुछ स्पोर्ट्स | पर इनमे से बहोत सारे इंजीनियर बन बैठे | बात होते है इनसे कभी , काम में मज़ा नहीं आता कहते है | मैं खुद को खुशनसीब मानता हूँ की मैं वही कर रहा हूँ जो करना चाहता था | दुःख इस बात का है की अभी भी बिना सोची सलाह लिए इंजीनियरिंग और IIT के रेस में लगे हुए है | एक मराठी कहावत याद आती है – “मुलाचे पाय पाण्यात दिसते ” | मतलब की बच्चे का मन किस चीज़ में लगता है ये पहले ही पता चल जाता है | काश की ये इतना आसान होता की वो अपने पैशन को फॉलो करे | पर हर पैशन पैसा नहीं देता | घर नहीं चलता | इज़्ज़त नहीं मिलती | अगर यहाँ तक आप पहुंच गए तो धन्यवाद् | आप भी इंजीनियरिंग के चूतियापे से बचिए और आस पास वालो को भी बचाइए | अगर मेरी हिंदी की पुरानी अध्यापिका ये पढ़ रही हो तो मैं व्याकरण में गलती के लिए माफ़ी चाहता हूँ | काफी समय हो गया हिंदी में लिखे हुए | ऊपर से टाइप करना थोड़ा मुश्किल है | कल ही एक प्रिय मित्र से बात करते हुए पता चला की मैं हिंदी भूल गया हूँ | सुधारने की कोशिश कर रहा हूँ |

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